Aandhi – आँधी

झनकार - 1944 ई०

उठो,  देखो वो  आँधी आ रही है

ऊफ़ुक़ पर बर्क़ सी लहरा रही है

क़यामत हर तरफ़  मंडला रही है

ज़मीं  हिचकोले पैहम खा रही है

उठो, देखो वो आँधी आ रही है

मचलती,  झूमती हलचल  मचाती

तड़पती, शोर करती, दिल दहलाती

गरजती,  चीख़ती,  फ़ित्ने उठाती

क़यामत  को जगाकर  ला रही है

उठो, देखो वो आँधी आ रही है

फ़िज़ा में  आतशीं परचम उड़ाती

ज़मीं पर  आग  के धारे  गिराती

शरारे  रोलती,   शोले  बिछाती

सुनहरी   रौशनी  फैला  रही  है

उठो, देखो वो आँधी आ रही है

भड़कती, आतिश-ए-सोज़ाँ की सूरत

लपकती  शोल:-ए-पर्रा  की  सूरत

उबलती  बह्र-ए-बे-पायाँ  की सूरत

उबलकर  सर पे  आयी जा रही है

उठो, देखो वो आँधी आ रही है

फ़िज़ा  कुल  जंग का मैदां बनी है

हवा  बिफरा  हुआ  तूफाँ  बनी है

ज़मीं  गहवार – ए- ज़ुबां बनी है

फ़लक से  ख़ाक सर टकरा रही है

उठो, देखो वो आँधी आ रही है

बढ़ी  आती  है  तामीरी तबाही

झुकी पड़ती है नूर-अफ़ज़ा सियाही

झकोले  खा  रहें  हैं  क़स्र-ए-शाही

हवा  ज़ंजीर-ए-दर  खड़का रही है

उठो, देखो वो आँधी आ रही है

बिठा  रक्खे  हैं  पहरे  बेकसी ने

ख़ज़ानों  के  फटे  जाते हैं  सीने

ज़मीं  दहली,  उभर  आये दफ़ीने

दफ़ीनों  को  हवा  ठुकरा रही  है

उठो, देखो वो आँधी आ रही है

निशानात-ए-सितम  थर्रा  रहे हैं

हुकूमत  के  अलम थर्रा  रहे  हैं

ग़ुलामी  के  क़दम   थर्रा  रहे  हैं

ग़ुलामी  अब  वतन  से जा रही है

उठो, देखो वो आँधी आ रही है